अध्याय ग्यारह – कृष्ण की बाल-लीलाएँ (10.11)
1 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा: हे महाराज परीक्षित, जब यमलार्जुन वृक्ष गिर पड़े तो आसपास के सारे ग्वाले भयानक शब्द सुनकर वज्रपात की आशंका से उस स्थान पर गये ।
2 वहाँ उन सबने यमलार्जुन वृक्षों को जमीन पर गिरे हुए देखा किन्तु वे विमोहित थे क्योंकि वे आँखों के सामने वृक्षों को गिरे हुए तो देख रहे थे किन्तु उनके गिरने के कारण का पता नहीं लगा पा रहे थे ।
3 कृष्ण रस्सी द्वारा ओखली से बँधे थे जिसे वे खींच रहे थे। किन्तु उन्होंने वृक्षों को किस तरह गिरा लि