radharashikrajdas (2)

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अध्याय नौ माता यशोदा द्वारा कृष्ण का बाँधा जाना

1-2 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा : एक दिन जब माता यशोदा ने देखा कि सारी नौकरानियाँ अन्य घरेलू कामकाजों में व्यस्त हैं, तो वे स्वयं ही दही मथने लगीं। दही मथते समय उन्होंने कृष्ण की बाल-क्रीड़ाओं का स्मरण किया और स्वयं उन क्रीड़ाओं के विषय में गीत बनाते हुए उन्हें गुनगुनाकर आनन्द लेने लगीं।

3 केसरिया-पीली साड़ी पहने, अपनी स्थूल कमर में करधनी बाँधे माता यशोदा मथानी की रस्सी खींचने में काफी परिश्रम कर रही थीं, उनकी चुड़ियाँ तथा कान के कुण्डल हिल-डुल र

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अध्याय चौबीस - भगवान का मत्स्यावतार

ब्लॉग संकलन अष्टम स्कन्ध(BLOG COLLECTION CANTO EIGHT0 .pdf

1 महाराज परीक्षित ने कहा : भगवान हरि नित्य ही अपने दिव्य पद पर स्थित हैं; फिर भी वे इस भौतिक जगत में अवतरित होते हैं और विभिन्न रूपों में अपने आपको प्रकट करते हैं। उनका पहला अवतार एक बड़ी मछली के रूप में हुआ। हे शुकदेव गोस्वामी ! मैं आपसे उस मत्स्यावतार की लीलाएँ सुनने का इच्छुक हूँ।

2-3 किस कारण से भगवान ने कर्म-नियम के अंतर्गत विविध रूप धारण करनेवाले सामान्य जीव की भाँति गर्हित मछली का रूप स्वीकार किया?

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