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अध्याय पचपन – प्रद्युम्न कथा  1 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा : वासुदेव का अंश कामदेव पहले ही रुद्र के क्रोध से जल कर राख हो चुका था। अब नवीन शरीर प्राप्त करने के लिए वह भगवान वासुदेव के शरीर में पुनः लीन हो गया। 2 उसका जन्म वैदर्भी की कोख से से हुआ…
3 hours ago
jagdish chandra chouhan commented on jagdish chandra chouhan's blog post शुकदेव गोस्वामी का प्रकट होना ( 1.19 )
"🙏🏿हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 🙏🏿"
13 hours ago
jagdish chandra chouhan commented on jagdish chandra chouhan's blog post कृष्ण रुक्मिणी विवाह (10.54)
"हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे💐💐
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 💐💐💐"
yesterday
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अध्याय चौवन – कृष्ण रुक्मिणी विवाह 1 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा : यह कहकर उन सारे क्रुद्ध राजाओं ने अपने कवच पहने और अपने अपने वाहनों में सवार हो गये। प्रत्येक राजा अपने हाथ में धनुष धारण किये भगवान कृष्ण का पीछा करते समय अपनी सेना से घिरा हुआ था।…
yesterday
jagdish chandra chouhan commented on jagdish chandra chouhan's blog post कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का हरण (10.53)
"🙏हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 🙏"
yesterday
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अध्याय तिरपन – कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का हरण 1 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा: इस तरह कुमारी वैदर्भी का गुप्त सन्देश सुनकर यदुनन्दन ने ब्राह्मण का हाथ अपने हाथ में ले लिया और मुसकाते हुए उससे इस प्रकार बोले। 2 भगवान ने कहा: जिस तरह रुक्मिणी का मन मुझ…
Wednesday
jagdish chandra chouhan commented on jagdish chandra chouhan's blog post भगवान कृष्ण के लिए रुक्मिणी सन्देश  (10.52)
"🙏हरे कृष्ण🙏"
Tuesday
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अध्याय बावन – भगवान कृष्ण के लिए रुक्मिणी सन्देश 1 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा : हे राजा, इस प्रकार कृष्ण द्वारा दया दिखाये गए मुचुकुन्द ने उनकी प्रदक्षिणा की और उन्हें नमस्कार किया। तब इक्ष्वाकुवंशी प्रिय मुचुकुन्द गुफा के मुँह से बाहर आये। 2 यह…
Tuesday
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अध्याय इक्यावन – मुचुकुन्द का उद्धार 1-6 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा : कालयवन ने भगवान को मथुरा से उदित होते चन्द्रमा की भाँति आते देखा। देखने में भगवान अतीव सुन्दर थे, उनका वर्ण श्याम था और वे रेशमी पीताम्बर धारण किये थे। उनके वक्षस्थल पर श्रीवत्स…
Monday
jagdish chandra chouhan commented on jagdish chandra chouhan's blog post श्रीभगवान की स्तुतियाँ - Glorification of God - श्रीकृष्ण शरणम ममः
"🙏कृपया मेरा विनम्र प्रणाम स्वीकार करें। Please accept my humble obeisances
कृष्णकृपामूर्ति अभय चरणारविन्द भक्ति वेदान्त स्वामी श्रील प्रभुपाद की जय हो All glories to Srila Prabhupada. 🙏
हरि बोल! हरि बोल! हरि बोल!"
Sunday
jagdish chandra chouhan commented on jagdish chandra chouhan's blog post श्रीमद भगवद्गीता यथारूप अध्याय अठारह उपसंहार—संन्यास की सिद्धि
"🙏कृपया मेरा विनम्र प्रणाम स्वीकार करें। Please accept my humble obeisances
कृष्णकृपामूर्ति अभय चरणारविन्द भक्ति वेदान्त स्वामी श्रील प्रभुपाद की जय हो All glories to Srila Prabhupada. 🙏
हरि बोल! हरि बोल! हरि बोल!"
Sunday
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अध्याय पचास – कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना 1 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा : जब कंस मार डाला गया तो हे भरतर्षभ, उसकी दो पटरानियाँ अस्ति तथा प्राप्ति अत्यन्त दुखी होकर अपने पिता के घर चली गई। 2 दुखी रानियों ने अपने पिता मगध के राजा जरासन्ध से…
Sunday
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अध्याय उनचास – अक्रूर का हस्तिनापुर जाना  1-2 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा : अक्रूर पौरव शासकों की ख्याति से प्रसिद्ध नगरी हस्तिनापुर गये। वहाँ वे धृतराष्ट्र, भीष्म, विदुर तथा कुन्ती के साथ साथ बाह्यिक तथा उसके पुत्र सोमदत्त से मिले। उन्होंने…
Jun 12
jagdish chandra chouhan commented on jagdish chandra chouhan's blog post कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि (10.48)
"🙏हरे कृष्ण🙏"
Jun 11
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अध्याय अड़तालीस - कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि 1 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा :   तदनन्तर सबके स्वामी भगवान कृष्ण ने सेवा करने वाली त्रिवक्रा को तुष्ट करना चाहा, अतः वे उसके घर गये। 2  त्रिवक्रा का घर ऐश्वर्ययुक्त साज-सामान से बड़ी शान से सजाया…
Jun 11
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अध्याय सैंतालीस --  भ्रमर गीत  1-2 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा : व्रज की ललनाएँ कृष्ण के अनुचर को देखकर चकित हो गई। उसके हाथ लम्बे लम्बे थे और आँखें नये खिले कमल जैसी थीं। वह पीत वस्त्र धारण किये था, गले में कमल की माला थी तथा अत्यन्त परिष्कृत किये…
Jun 10
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