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अध्याय आठ - भगवान नृसिंह द्वारा असुरराज का वध1 नारद मुनि ने आगे कहा : सारे असुरपुत्रों ने प्रह्लाद महाराज के दिव्य उपदेशों की सराहना की और उन्हें अत्यंत गंभीरतापूर्वक ग्रहण किया। उन्होंने षंड तथा अमर्क नामक अपने गुरुओं द्वारा दिये गये भौतिकतावादी…
10 hours ago
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अध्याय सात - प्रह्लाद ने गर्भ में क्या सीखा 1 नारद मुनि ने कहा : यद्यपि प्रह्लाद महाराज असुरों के परिवार में जन्मे थे, किन्तु वे समस्त भक्तों में सबसे महान थे। इस प्रकार अपने असुर सहपाठियों द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने मेरे द्वारा कहे गये शब्दों का…
yesterday
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अध्याय छह - प्रह्लाद द्वारा अपने असुर सहपाठियों को उपदेश1 प्रह्लाद महाराज ने कहा : पर्याप्त रूप से बुद्धिमान मनुष्य को चाहिए कि वह जीवन के प्रारम्भ से ही अर्थात बाल्यकाल से ही अन्य सारे कार्यों को छोड़कर भक्ति कार्यों के अभ्यास में इस मानव शरीर का…
Friday
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अध्याय पाँच - हिरण्यकशिपु का साधु-सदृश पुत्र प्रह्लाद महाराज- 1 महामुनि नारद ने कहा : हिरण्यकशिपु की अगुवाई में असुरों ने शुक्राचार्य को अनुष्ठान सम्पन्न कराने के लिए पुरोहित के रूप में चुना। शुक्राचार्य के दो पुत्र षंड तथा अमर्क हिरण्यकशिपु के महल…
Thursday
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अध्याय चार - ब्रह्मांड में हिरण्यकशिपु का आतंक1 नारद मुनि ने कहा : ब्रह्माजी हिरण्यकशिपु की दुष्कर तपस्या से अत्यंत प्रसन्न थे। अतएव जब उसने उनसे वरों की याचना की तो उन्होंने निस्संदेह वे दुर्लभ वर प्रदान कर दिये। 2 ब्रह्माजी ने कहा : हे…
Wednesday
jagdish chandra chouhan commented on jagdish chandra chouhan's blog post हिरण्यकशिपु की अमर बनने की योजना (7.3)
"🙏हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 🙏"
Tuesday
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अध्याय तीन - हिरण्यकशिपु की अमर बनने की योजना  1 नारद मुनि ने महाराज युधिष्ठिर से कहा : दैत्यराज हिरण्यकशिपु अजेय तथा वृद्धावस्था एवं शरीर की जर्जरता से मुक्त होना चाहता था। वह अणिमा तथा लघिमा जैसी समस्त योग-सिद्धियों को प्राप्त करना, मृत्युरहित…
Tuesday
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अध्याय दो - असुरराज हिरण्यकशिपु1 श्री नारद मुनि ने कहा : हे राजा युधिष्ठिर, जब भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण करके हिरण्याक्ष को मार डाला, तो हिरण्याक्ष का भाई हिरण्यकशिपु अत्यधिक क्रुद्ध हुआ और विलाप करने लगा। 2 क्रोध से भरकर तथा अपने होंठ काटते…
Feb 22
jagdish chandra chouhan commented on jagdish chandra chouhan's blog post पुंसवन व्रत का अनुष्ठान (6.19)
"हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे!!
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे!!!💐💐"
Feb 21
jagdish chandra chouhan commented on jagdish chandra chouhan's blog post समदर्शी भगवान (7.1)
"हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 💐💐💐"
Feb 21
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अध्याय एक - समदर्शी भगवान 1 राजा परीक्षित ने पूछा : हे ब्राह्मण, भगवान विष्णु सबों के शुभचिंतक होने के कारण हर एक को समान रूप से अत्यधिक प्रिय हैं, तो फिर उन्होंने किस तरह एक साधारण मनुष्य की भाँति इन्द्र का पक्षपात किया और उसके शत्रुओं का वध किया?…
Feb 21
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अध्याय उन्नीस - पुंसवन व्रत का अनुष्ठान 1 महाराज परीक्षित ने कहा : हे प्रभो ! आप पुंसवन व्रत के संबंध में पहले ही बता चुके हैं। अब मैं इसके विषय में विस्तार से सुनना चाहता हूँ क्योंकि मैं समझता हूँ कि इस व्रत का पालन करके भगवान विष्णु को प्रसन्न…
Feb 20
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अध्याय अठारह - राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत 1 श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा : पृश्नि, जो अदिति के बारह पुत्रों में से पांचवें पुत्र सविता की पत्नी थी, तीन पुत्रियाँ सावित्री, व्याह्यति तथा त्रयी और अग्निहोत्र, पशु, सोम, चार्तुमास्य तथा…
Feb 19
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 अध्याय सत्रह - माता पार्वती द्वारा चित्रकेतु को शाप 1 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा : जिस दिशा में भगवान अनंत अन्तर्धान हुए थे उस दिशा की ओर नमस्कार करके, राजा चित्रकेतु विद्याधरों का अगुवा बनकर बाह्य अन्तरिक्ष में यात्रा करने लगा। 2-3 महान साधुओं…
Feb 18
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अध्याय सोलह - राजा चित्रकेतु की परमेश्र्वर से भेंट1 श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा : हे राजा परीक्षित ! नारद ऋषि ने अपनी योगशक्ति से शोकाकुल स्वजनों के समक्ष उस पुत्र को ला दिया और फिर वे इस प्रकार बोले। 2 श्री नारद मुनि ने कहा : हे जीवात्मा !…
Feb 17
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अध्याय पंद्रह - नारद तथा अंगिरा ऋषियों द्वारा राजा चित्रकेतु को उपदेश 1 श्री शुकदेव गोस्वामी बोले--- जब राजा चित्रकेतु शोकग्रस्त होकर अपने पुत्र के शव के निकट पड़े मृतप्राय हुए थे तो नारद तथा अंगिरा नामक दो महर्षियों ने उन्हें आध्यात्मिक चेतना के…
Feb 16
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