भगवद्गीता यथारूप 108 महत्त्वपूर्ण श्लोक
अध्याय आठ भगवत्प्राप्ति
आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोSर्जुन ।
मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते ॥ 16 ॥
आ-ब्रह्म-भुवनात्– ब्रह्मलोक तक;लोकाः– सारे लोक;पुनः– फिर;आवर्तिनः– लौटने वाले;अर्जुन– हे अर्जुन;माम्– मुझको;उपेत्य– पाकर;तु– लेकिन;कौन्तेय– हे कुन्तीपुत्र;पुनःजन्म– पुनर्जन्म;न– कभी नहीं;विद्यते– होता है।