भगवद्गीता यथारूप 108 महत्त्वपूर्ण श्लोक
अध्याय 2 : गीता का सार
देहिनोSस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा ।
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति ।। 13 ।।
देहिनः– शरीर धारी की;अस्मिन्– इसमें;यथा– जिस प्रकार;देहे– शरीर में;कौमराम्– बाल्यावस्था;यौवनम्– यौवन, तारुण्य;जरा– वृद्धावस्था;तथा– उसी प्रकार;देह-अन्तर– शरीर के स्थानान्तरण की;प्राप्– उपलब्धि;धीरः– धीर व्यक्ति;तत्र– उस विषय में;न– कभी नहीं;मुह्यति– मोह को प्राप्त होता है।
भावार्थ : जिस प्रकार शरीरधारी आत्मा इस (वर्तमान) शरीर में बाल्यावस्था से त
