भगवद्गीता यथारूप 108 महत्त्वपूर्ण श्लोक
अध्याय चार दिव्य ज्ञान
जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः ।
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोSर्जुन।। 9 ।।
जन्म– जन्म;कर्म– कर्म;च– भी;मे– मेरे;दिव्यम्– दिव्य;एवम्– इस प्रकार;यह– जो कोई;वेत्ति– जानता है;तत्त्वतः– वास्तविकता में;त्यक्त्वा– छोड़कर;देहम्– इस शरीर को;पुनः– फिर;जन्म– जन्म;न– कभी नहीं;एति– प्राप्त करता है;माम्– मुझको;एति– प्राप्त करता है;सः– वह;अर्जुन– हे अर्जुन।



