भगवद्गीता यथारूप 108 महत्त्वपूर्ण श्लोक
अध्याय चार दिव्य ज्ञान
श्री भगवानुवाच
इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् ।
विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेSब्रवीत् ।। 1 ।।
श्री-भगवान् उवाच– श्रीभगवान् ने कहा;इमम्– इस;विवस्वते– सूर्यदेव को;योगम्– परमेश्वर क्र साथ अपने सम्बन्ध की विद्या को;प्रोक्तवान्– उपदेश दिया;अहम्– मैंने;अव्ययम्– अमर;विवस्वान्– विवस्वान् (सूर्यदेव के नाम) ने;मनवे– मनुष्यों के पिता (वैवस्वत) से;प्राह– कहा;मनुः– मनुष्यों के पिता ने;इक्ष्वाकवे– राजा इक्ष्वाकु से;अब्रवीत्– कहा।
