भगवद्गीता यथारूप 108 महत्त्वपूर्ण श्लोक
अध्याय सात भगवदज्ञान
येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम् ।
ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः ॥ 28 ॥
येषाम्– जिन;तु– लेकिन;अन्त-गतम्– पूर्णतया विनष्ट;पापम्– पाप;जनानाम्– मनुष्यों का;पुण्य– पवित्र;कर्मणाम्– जिनके पूर्व कर्म;ते– वे;द्वन्द्व– द्वैत के;मोह– मोह से;निर्मुक्ताह– मुक्त;भजन्ते– भक्ति में तत्पर होते हैं;माम्– मुझको;दृढ-व्रताः– संकल्पपूर्वक।
भावार्थ : जिन मनुष्यों ने पूर्वजन्मों में तथा इस जन्म में पुण्यकर्म किये हैं और जिनके पापकर्म