अपने जीवन की अन्तिम अवस्था में तपस्या हेतु वन में गए हुए राजा पृथु ने भगवान के चरणकमलों का ध्यान करते हुए अपने भौतिक शरीर को त्याग दिया। साथ आयी हुई रानी अर्चि भी अपने पतिदेव के चरणों का ध्यान करते हुए अग्नि में जलकर सती हो गयीं। देवताओं ने उनकी प्रशंसा में पुष्पवृष्टि की। श्रीमद भागवतम 4.23.18-26 श्रील प्रभुपाद
अध्याय तेईस – महाराज पृथु का भगवदधाम गमन (4.23)
1-3 अपने जीवन की अन्तिम अवस्था में, जब महाराज पृथु ने देखा कि मैं वृद्ध हो चला हूँ तो उस महापुरुष ने, जो संसार का राजा था, अपने द्वारा सं
