श्रील शुकदेव गोस्वामी द्वारा स्तुति (2.4)
12 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा: मैं उन पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान को सादर नमस्कार करता हूँ, जो भौतिक जगत की सृष्टि के लिए प्रकृति के तीन गुणों को स्वीकार करते हैं। वे प्रत्येक के शरीर के भीतर निवास करनेवाले परम पूर्ण हैं और उनकी गतियाँ अचिन्त्य हैं।
13 मैं पुनः सम्पूर्ण जगत-रूप, अध्यात्म-रूप उन भगवान को सादर नमस्कार करता हूँ, जो पुण्यात्मा भक्तों को समस्त संकटों से मुक्ति दिलानेवाले तथा अभक्त असुरों की नास्तिक मनोवृत्ति की वृद्धि को विनष्ट करनेवाले हैं। जो अ