अध्याय सतहत्तर – कृष्ण द्वारा शाल्व का वध (10.77)
1 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जल से अपने को तरोताजा करने के बाद, अपना कवच पहनकर तथा अपना धनुष लेकर भगवान प्रद्युम्न ने अपने सारथी से कहा, “मुझे वहीं वापस ले चलो, जहाँ वीर द्युमान खड़ा है।"
2 प्रद्युम्न की अनुपस्थिति में द्युमान उनकी सेना को तहस-नहस किये जा रहा था, किन्तु अब प्रद्युम्न ने द्युमान पर बदले में आक्रमण कर दिया और हँसते हुए आठ नाराच बाणों से उसे बेध दिया।
3 इन बाणों में से चार से उसने द्युमान के चार घोड़ों को, एक बाण से उसके सारथी को त