भगवद्गीता यथारूप 108 महत्त्वपूर्ण श्लोक
अध्याय चार दिव्य ज्ञान
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ।। 11 ।।
ये– जो;यथा– जिस तरह;माम्– मेरी;प्रपद्यन्ते– शरण में जाते हैं;तान्– उनको;तथा– उसी तरह;एव– निश्चय ही;भजामि– फल देता हूँ;अहम्– मैं;मम– मेरे;वर्त्म– पथ का;अनुवर्तन्ते– अनुगमन करते हैं;मनुष्याः– सारे मनुष्य;पार्थ– हे पृथापुत्र;सर्वशः– सभी प्रकार से।



