Hare Krsna,
Please accept my humble obeisance. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.
केवल भक्ति से भगवान को यथारूप में जाना जा सकता है | भक्ति के 5 मुख्य रस : शांत रस, दास्य रस, साख्य रस, वात्सल्य रस तथा माधुर्य रस | इनमें से किसी एक में स्थित हो कर भक्त भगवान की सेवा करता है |
शान्त रस (तटस्थ अवस्था) का अर्थ है- भगवान कृष्ण के चरणकमलों में पूरी तरह अनुरुक्ति | जब भक्त शान्त रस को प्राप्त होता है, तो वह न तो स्वर्ग जाने की इच्छा करता है न मोक्ष की | ये तो कर्म तथा ज्ञान के


