Surrender to God

"𝐽𝑢𝑠𝑡 𝑠𝑢𝑟𝑟𝑒𝑛𝑑𝑒𝑟 𝑦𝑜𝑢𝑟𝑠𝑒𝑙𝑓 𝑡𝑜 𝐿𝑜𝑟𝑑 ℎ𝑒 𝑤𝑖𝑙𝑙 𝑎𝑐𝑐𝑒𝑝𝑡 𝑦𝑜𝑢 , 𝑑𝑜𝑛'𝑡 𝑤𝑜𝑟𝑟𝑦 𝑎𝑛𝑑 𝑦𝑜𝑢 𝑏𝑒𝑐𝑜𝑚𝑒 𝑡ℎ𝑒 𝑝𝑢𝑟𝑒𝑠𝑡 𝑖𝑛 ℎ𝑖𝑠 𝑔𝑢𝑖𝑑𝑎𝑛𝑐𝑒"

𝕃𝕠𝕣𝕕 𝕨𝕚𝕝𝕝 𝕒𝕔𝕔𝕖𝕡𝕥 𝕪𝕠𝕦 𝕕𝕠 𝕟𝕠𝕥 𝕗𝕖𝕒𝕣 -

◉ 𝗟𝗼𝗿𝗱 𝗥𝗮𝗺𝗮 𝘀𝗮𝘆𝘀 -

सकृदेव प्रपन्नाय तवास्मीति च याचते |
अभयं सर्वभूतेभ्यो ददाम्येतद व्रतं मम ||
(वाल्मीकि रामायण 6:18:33)

Transliteration:
sakṛdeva prapannāya tavāsmīti ca yāchate |abhayaṃ sarvabhūtebhyo dadāmyetad vratam mama ||
(Vālmīki Rāmāyaṇa 6:18:33)

English Translation: Just once, for the one who surrenders unto Me, declaring 'I am Yours,' I bestow fearlessness from all beings. This is My vow.

Hindi translation : जो कोई एक बार भी ‘ मैं तुम्हारा हूँ ‘ – ऐसा कहकर शरणागत होता है उसे में समस्त प्राणियों से निर्भय कर देता हूँ यह मेरा व्रत है |

◉ 𝗟𝗼𝗿𝗱 𝗞𝗿𝗶𝘀𝗵𝗻𝗮 𝘀𝗮𝘆𝘀 -

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।।
(गीता 18:66)

Transliteration:
sarvadharmān parityajya māmekaṃ śaraṇaṃ vraja |
ahaṃ tvā sarvapāpebhyo mokṣayiṣyāmi mā śuchaḥ || (Gītā 18:66)

English Translation: Abandon all varieties of religion and just surrender unto Me. I shall deliver you from all sinful reactions. Do not fear.

Hindi translation : सम्पूर्ण धर्मों का आश्रय छोड़कर तू केवल मेरी शरण में आ जा। मैं तुझे सम्पूर्ण पापों से मुक्त कर दूँगा, चिन्ता मत कर।

◉ 𝗣𝗮𝗻𝗰𝗵𝗿𝗮𝘁𝗿𝗶𝗸 𝗦𝗮𝗺𝗵𝗶𝘁𝗮 𝗰𝗼𝗻𝗳𝗶𝗿𝗺 -

दुराचारोऽपि सर्वाशी कृतघ्नो नास्तिकः पुरा ।
समाश्रयेदादिदेवं श्रद्धया शरणं यदि ॥ २३ ॥
निर्दोषं विद्धि तं जन्तुं प्रभावात् परमात्मनः ।
(सात्वत संहिता 16:23)

Transliteration:
durācārō'pi sarvāśī kṛtaghnō nāstikaḥ purā
samāśrayedādidevaṃ śraddhayā śaraṇaṃ yadi || 23 ||
nirdoṣaṃ viddhi taṃ jantuṃ prabhāvāt paramātmanaḥ |
(sātvata saṃhitā 16:23)

English Translation: Even the immoral, the lowest of men, the ungrateful and the atheist can become completely pure by taking refuge in the Supreme Lord with faith, knowing that the influence of the Supreme Soul makes all beings faultless.

Hindi translation: दुराचारी, कुत्ते, चाण्डाल के समान सब का सब कुछ खाने वाला, सर्वाशी, कृतघ्न, नास्तिक भी यदि श्रद्धापूर्वक आदिदेव परमात्मा की शरण ग्रहण करे, तो उसे परमात्मा के प्रभाव से सर्वथा दोषमुक्त समझना चाहिये ।

◉ 𝗠𝗮𝗵𝗮𝗿𝗶𝘀𝗵𝗶 𝗕𝗵𝗮𝗿𝗮𝗱𝘃𝗮𝗷𝗮 𝗰𝗹𝗮𝗶𝗺 𝘁𝗵𝗲 𝘀𝗮𝗺𝗲 -

प्राप्तुमिच्छन्परां सिद्धिं जनः सर्वोऽप्यकिञ्चनः ।
श्रद्धया परया युक्तो हरि शरणमाश्रयेत ॥१.१३॥
न जातिभेदं न कुलं न लिड्गं न गुणक्रिया ।
न देशकालौ नावस्थां योगो यमपेक्षते ॥१.१४॥
ब्रह्मक्षत्रविशः शूद्राः स्त्रियाश्चान्तरजास्तथा ।
सर्व एवं प्रपद्येरन् सर्वधातारमच्युतम् ॥१.१५॥
(भारद्वाज संहिता 1:15)

Transliteration:
prāptumicchanparāṁ siddhiṁ janaḥ sarvo' pyakinchanaḥ śraddhayā parayā yukto hari śaraṇamāśrayet ||1.13||
na jātibhedaṁ na kulaṁ na liṅgaṁ na guṇakriyā na deśakālau nāvasthāṁ yogo yamapekṣate ||1.14||
brahmakṣatraviśaḥ śūdrāḥ striyāś cāntarajāstathāsarva evaṁ prapadyeran sarvadhātāramachyutam ||1.15||
(Bhāradvāja Saṁhitā 1:15)

English translation: Everyone desires to attain the highest goal, and to achieve that, one should take refuge in Lord Hari with unwavering faith and devotion. In this process of surrendering to God, one need not worry about factors such as birth, caste, gender, work, country, time, situation, or qualification. Whether one is a Brahmana, Kshatriya, Vaishya, Shudra, woman, or even an outcaste, everyone should take shelter of the supreme Lord Achyuta with complete faith, who is the sustainer of all beings.

Hindi translation : जो परम सिद्धि को प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें चाहिये कि अकिञ्चन भाव से, परम श्रद्धा से युक्त होकर भगवान श्री हरि की शरण ले । शरणागति के इस न्यास योग (या पाञ्चरात्रिक विधि) को अंगीकार करने में जाति, कुल, लिंग, गुण-कर्म, देश, काल, पात्र, अवस्था आदि किसी भी वस्तु का चिन्तन करने की आवश्यकता नहीं है । ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, स्त्री, अन्त्यज, और अन्य कोई भी व्यक्ति क्यों न हो, उसे परम श्रद्धा से, सभी जीवों के धाता (पालनकर्ता) भगवान् अच्युत की शरण लेनी चाहिये ।

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