आज कल इंटरनेट के युग में हर कोई एक दूसरे से जुड़ा हुआ है । लेकिन अधिकाधिक अंग्रेज़ी का ही प्रयोग कि जाने की वजह से बहुत समय से  हिंदी भाषी भक्तों को एक कमी महसूस हो रही थी। 

ISKCON Desire Tree की ऒर से एक छोटा सा प्रयास है की हम हिंदी भाषी भक्तो के बीच भी पहुंचें और भाषा की बाधा के कारण इंटरनेट पर साधू-संग से वंचित हो रहे भक्तों को एक साथ एक ही मंच पर ला सकें । 

आप सभी से अनुरोध है की अधिक से अधिक भक्तों  को इस से जोड़ें एवं इस सुविधा का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें । 

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यह सब चीजें भगवान का उपहार है, और इन सबसे भगवान की महिमा का प्रचार करना चाहिये।

 दो प्रकार के साधु हैं एक है भजनानंदी जो खुद के भजन में संतुष्ट होते हैं। और दूसरे प्रकार के साधु है गोष्ठियाँनन्दी, गोष्ठी मतलब जन समागम में रहते हैं प्रचार करने के लिये । सब लोगों को कहते हैं - “हे भाईयों, हे बहनों देखो विचार करो, आपके जीवन का क्या उद्देश्य है ?” उद्देश्य होना चाहिये कृष्ण भक्ति का, तो क्यों हम जीवन काम, क्रोध, मद, मोह, लोभ का विस्तार करने के लिये इस्तेमाल करते हैं, इसलिए ये सब कृष्ण सेवा में लगाना चाहिये। हर व्यक्ति का हर प्रयास, हर व्यक्ति का हर वचन, हर व्यक्ति का चिंतन खाली कृष्ण पर केन्द्रित हो। पूरे समाज में हर व्यक्ति का एक ही चिंतन एक ही ध्यान होगा। कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण कृष्ण ।

सब सहयोगिता में कृष्ण सेवा करेंगे, यह सब संभव होगा केवल कृष्ण भक्ति प्रचार से ।

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मृदंगों और कर्तलों के साथ हरे कृष्ण का जप…। यह कीर्तन भी है; जब आप पुस्तकों को वितरित करते हैं, तो वह भी कीर्तन है

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पवित्र नाम की शक्ति

एक बार अकबर और उनके मंत्री बीरबल जंगल के रास्ते से जा रहे थे। लम्बी दूरी की यात्रा करके वे इतने थक गए तो उन्होंने एक पेड़ के नीचे बैठने का निश्चय किया। लम्बी यात्रा के पश्चात उनको भूख लगी तब अकबर ने बीरबल को कहा, "बीरबल चलो देखते हैं पास में कोई नगर होगा तो कुछ भूख मिटाते हैं, वैसे भी इस जंगल में कौन आएगा हमे भोजन देने ?"बीरबल भगवन श्री राम के नामों का उच्चारण कर रहे थे, उन्होंने अकबर की बातों को सुना पर कुछ जवाब नहीं दिया। अकबर ने कहा, "अरे! यह तुम्हारा नाम जप से क्या पेट भर जायेगा?, भोजन लेने…

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नारद मुनि और शिकारी मृगारी

एक बार देवर्षि नारद मुनि भगवान से मिलने बैकुंठ गए। उसके पश्चात वे त्रिवेणी संगम (प्रयाग इलाहबाद) में पवित्र स्नान किये। त्रिवणी जहाँ तीनो पवित्र नदियों का संगम अर्थात गंगा जी, जमुना जी और सरस्वती जी का मिलाप होता है। स्नान करने के पश्चात वे जंगल के रास्ते से गुजर रहे थे, वहां उन्होंने अधमरे भालू, हिरन के बच्चे और कई जानवरों को देखा जिन्हे तीर के जख्म से अतयन्त रक्त निकल रहा था। नारद मुनि के हृदय में अत्यन्त पीड़ा हुयी , वे उस रस्ते की तरफ चल पड़े जिधर से ये सारे जानवर आ रहे थे। वे उस जगह पहुंचे…

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भगवन के दास का दास बनने की महिमा

आप सभी को हरे कृष्णा, एक जंगल में एक संत अपनी कुटिया में रहते थे। एक किरात (शिकारी), जब भी वहाँ से निकलता संत को प्रणाम ज़रूर करता था।एक दिन किरात संत से बोला की मैं तो मृग का शिकार करता हूँ,आप किसका शिकार करने जंगल में बैठे हैं.? संत बोले - श्री कृष्ण का, और रोने लगे। तब किरात बोला अरे, बाबा रोते क्यों हो ? मुझे बताओ वो दिखता कैसा है ? मैं पकड़ के लाऊंगा उसको।संत ने भगवान का स्वरुप बताया, कि वो सांवला है, मोर पंख लगाता है, बांसुरी बजाता है। किरात बोला: बाबा जब तक आपका शिकार पकड़ नहीं लाता, पानी…

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