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अध्याय एक – कलियुग के पतित वंश (12.1)

1-2 श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हमने इसके पूर्व मागध वंश के जिन भावी शासकों के नाम गिनाए उनमें अन्तरिम राजा पुरञ्जय था, जो बृहद्रथ के वंशज के रूप में जन्म लेगा। पुरञ्जय का मंत्री शुनक राजा की हत्या करके अपने पुत्र प्रद्योत को सिंहासनारूढ़ करेगा। प्रद्योग का पुत्र पालक होगा और उसका पुत्र विशाखयूप होगा जिसका पुत्र राजक होगा।

3 राजक का पुत्र नन्दिवर्धन होगा और प्रद्योतन वंश में पाँच राजा होंगे जो 138 वर्षों तक पृथ्वी का भोग करेंगे।

4 नन्दिवर्धन का शिशुनाग नामक पुत्र होगा और उसका पुत्र काकवर्ण कहलायेगा। काकवर्ण का पुत्र क्षेमधर्मा होगा तथा क्षेमधर्मा का पुत्र क्षेत्रज्ञ होगा।

5 क्षेत्रज्ञ का पुत्र विधिसार होगा और उसका पुत्र अजातशत्रु होगा। अजातशत्रु के दर्भक नाम का पुत्र होगा और उसका पुत्र अजय होगा।

6-8 अजय दूसरे नन्दिवर्धन का पिता बनेगा, जिसका पुत्र महानन्दि होगा। हे कुरुश्रेष्ठ, शिशुनाग वंश के ये दस राजा कलियुग में 360 वर्षों तक राज्य करेंगे। हे परीक्षित, राजा महानन्दि की शूद्रा पत्नी के गर्भ से अत्यन्त शक्तिशाली पुत्र होगा जो नन्द कहलायेगा। वह लाखों सैनिकों तथा प्रभूत सम्पत्ति का स्वामी होगा। वह क्षत्रियों में कहर ढायेगा और उसके बाद के प्रायः सारे राजागण अधार्मिक शूद्र होंगे।

9 महापद्म का स्वामी, राजा नन्द, सारी पृथ्वी पर इस तरह शासन करेगा मानों द्वितीय परशुराम हो और उसकी सत्ता को कोई चुनौती नहीं दे सकेगा।

10 सुमाल्य इत्यादि उसके आठ पुत्र होंगे जो शक्तिशाली राजाओं के रूप में पृथ्वी को एक सौ वर्षों तक अपने वश में रखेंगे।

11 कोई एक ब्राह्मण (चाणक्य) राजा नन्द तथा उसके आठ पुत्रों के साथ विश्वासघात करेगा और उनके वंश का विनाश कर देगा। उनके न रहने पर कलियुग में मौर्यगण विश्व पर शासन करेंगे।

12 यह ब्राह्मण चन्द्रगुप्त को सिंहासन पर बैठाएगा जिसका पुत्र वारिसार होगा। वारिसार का पुत्र अशोकवर्धन होगा।

13 अशोकवर्धन के बाद सुयशा होगा जिसका पुत्र संगत होगा। इसका पुत्र शालीशूक होगा जिसका पुत्र सोमशर्मा होगा और सोमशर्मा का पुत्र शतधन्वा होगा और इसका पुत्र बृहद्रथ कहलायेगा।

14 हे कुरुश्रेष्ठ, ये दस मौर्य राजा कलियुग के 137 वर्षों तक पृथ्वी पर राज्य करेंगे।

15-17 हे राजा परीक्षित, इसके बाद अग्निमित्र राजा बनेगा, फिर सुज्येष्ठ और सुज्येष्ठ के बाद वसुमित्र, भद्रक तथा भद्रक का पुत्र पुलिन्द राजा होंगे। इसके बाद पुलिन्द का पुत्र घोष शासन करेगा जिसके बाद वज्रमित्र, भागवत तथा देवभूति होंगे। इस तरह हे कुरुश्रेष्ठ, दस शुंग राजा पृथ्वी पर एक सौ वर्षों से अधिक तक राज्य करेंगे। तब यह पृथ्वी काण्व वंश के राजाओं के अधीन हो जायेगी जिनमें बहुत ही कम सद्गुण होंगे।

18 काण्व वंश से सम्बद्ध एक बुद्धिमान मंत्री वसुदेव, शुंग राजाओं में से देवभूति नामक अत्यन्त विलासी अन्तिम राजा को मारेगा और स्वयं शासन हाथ में ले लेगा।

19 वसुदेव का पुत्र भूमित्र होगा और उसका पुत्र नारायण होगा। काण्व वंश के ये राजा पृथ्वी पर कलियुग के अगले 345 वर्षों तक शासन चलायेंगे।

20 काण्वों का अन्तिम राजा सुशर्मा, अन्ध्र जाति के अधम शूद्र बली नामक नौकर के हाथों मारा जायेगा। यह अत्यन्त भ्रष्ट महाराज बली कुछ काल तक पृथ्वी पर शासन करेगा।

21-26 बली का भाई, कृष्ण, पृथ्वी का अगला शासक बनेगा। उसका पुत्र शान्तकरण होगा और शान्तकरण का पुत्र पौर्णमास होगा। पौर्णमास का पुत्र लम्बोदर होगा जिसका पुत्र महाराज चिबिलक होगा। चिबिलक से मेघस्वाति उत्पन्न होगा जिसका पुत्र अटमान होगा। अटमान का पुत्र अनिष्टकर्मा होगा। उसका पुत्र हालेय होगा जिसका पुत्र तलक होगा, तलक का पुत्र पुरुषभीरु होगा और उसके बाद सुनन्दन राजा बनेगा। सुनन्दन के बाद चकोर तथा आठ बहुगण होंगे जिनमें से शिवस्वाति शत्रुओं का महान दमनकर्ता होगा। शिवस्वाति का पुत्र गोमती होगा जिसका पुत्र पुरीमान होगा। पुरीमान का पुत्र मेदशीरा होगा। उसका पुत्र शिवस्कन्द होगा जिसका पुत्र यज्ञश्री होगा। यज्ञश्री का पुत्र विजय होगा जिसके दो पुत्र होंगे – चन्द्रविज्ञ तथा लोमधी। हे कुरुओं के प्रिय पुत्र, ये तीस राजा पृथ्वी पर कुल 456 वर्षों तक अपनी प्रभुसत्ता बनाये रखेंगे।

27 तत्पश्चात अवभृति नगरी की आभीर जाति के सात राजा होंगे और तब दस गर्दभी होंगे। उनके बाद कंक के सोलह राजा शासन करेंगे और वे अपने अत्यधिक लोभ के लिए विख्यात होंगे।

28 तब आठ यवन शासन सँभालेंगे जिनके बाद चौदह तुरुष्क, दस गुरुण्ड तथा ग्यारह मौल वंश के राजा होंगे।

29-31 ये आभीर, गर्दभी तथा कंक 1099 वर्षों तक पृथ्वी का भोग करेंगे और मौलगण 300 वर्षों तक राज्य करेंगे। इन सबके दिवंगत होने पर किलकिला नगरी में भूतनन्द, वंगिरि, शिशुनन्दी, उसका भाई यशोनन्दी तथा प्रविरक नामक राजाओं का वंश उदय होगा। किलकिला के ये राजा कुल मिलकर 106 वर्षों तक प्रभुत्व जमाये रखेंगे।

32-33 किलकिलाओं के बाद उनके तेरह पुत्र, बाह्विक होंगे और उनके बाद राजा पुष्पमित्र, उसका पुत्र दुर्मित्र, सात अन्ध्र, सात कौशल तथा विदुर और निषध प्रान्तों के राजा भी एक ही समय विश्व के अलग-अलग भागों में शासन करेंगे।

34 तब मागधों का राजा विश्वस्फूर्जी प्रकट होगा जो दूसरे पुरञ्जय के समान होगा। वह समस्त सभ्य वर्णों को निम्न श्रेणी के असभ्य मनुष्यों में बदल देगा, जिस तरह पुलिन्द, यदु तथा मद्रक होते हैं।

35 मूर्ख राजा विश्वस्फ़ुर्जी सारे नागरिकों को नास्तिकता की ओर ले जाएगा और अपनी शक्ति का उपयोग क्षत्रिय जाति को पूर्णतया ध्वन्स करने में करेगा। वह अपनी राजधानी पद्मवती में गंगा के उद्गम से लेकर प्रयाग तक शासन करेगा।

36 उस काल में सौराष्ट्र, अवनति, आभीर, शूर, अर्बुद तथा मालव प्रान्तों के ब्राह्मण अपने सारे विधि-विधान भूल जायेंगे और इन स्थानों के राजवंशों के सदस्य शूद्रों जैसे ही हो जाएँगे।

37 सिंधु नदी का तटवर्ती भाग तथा चन्द्रभागा, काउंटी एवं काश्मीर के जनपद शूद्रों, पतित ब्राह्मणों और मांसाहारियों के द्वारा शासित होंगे। वे वैदिक सभ्यता के मार्ग को त्यागकर समस्त आध्यात्मिक शक्ति खो चुकेंगे।

38 हे राजा परीक्षित, उसी समय शासन करनेवाले ऐसे अनेक असभ्य राजा होंगे और वे सब दान न देने वाले, अत्यन्त क्रोधी तथा अधर्म और असत्य के महान भक्त होंगे।

39-40 ये बर्बर लोग राजा के वेश में निर्दोष स्त्रियों, बच्चों, गौवों और ब्राह्मणों की हत्या करके तथा अन्य पुरुषों की पत्नियों को लुभाकर एवं सम्पत्ति को लूट करके सारी प्रजा का भक्षण करेंगे। उनका स्वभाव अनियमित होगा, उनमें चरित्र बल नहीं के बराबर होगा तथा वे अल्पायु होंगे। निस्सन्देह किसी वैदिक अनुष्ठान से शुद्ध न होने तथा विधि-विधानों के अभाव में, वे रजो तथा तमोगुणों से पूरी तरह प्रच्छन्न होंगे।

41 इन निम्न जाति के राजाओं द्वारा शासित प्रजा अपने शासकों के चरित्र, आचरण तथा वाणी का अनुकरण करेगी। वे लोग अपने अपने नायकों से तथा एक-दूसरे से सताये जाकर विनष्ट हो जायेंगे।

(समर्पित एवं सेवारत -- जगदीश चन्द्र चौहान)

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Comments

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