Hare Krsna,

Please accept my humble obeisance. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

भगवद्-भक्त के 28 गुण :

श्री कृष्ण ने श्री उद्धव को बद्ध तथा मुक्त जीवों के लक्षण बताते समय भगवद्-भक्त (सन्त पुरुष) के इन 28 गुणों का वर्णन किया (SB.11.11.29-32):

1.   वह अन्यों के कष्ट को सहन न करने वाला होता है |

2.   वह कभी दूसरों को हानि नहीं पहुंचाता |

3.   दूसरों के आक्रामक होने पर भी वह सहिष्णु होता है |

4.   सारे जीवों को क्षमा करने वाला होता है |

5.   उसकी शक्ति तथा जीवन की सार्थकता सत्य से ही मिलती है |

6.   वह समस्त ईर्ष्या-द्वेष से मुक्त होता है |

7.   भौतिक सुख-दुख में उसका मन समभाव रहता है |

8.   वह अन्य लोगों के कल्याण हेतु कार्य करने में अपना सारा समय लगाता है |

9.   उसकी बुद्धि भौतिक इच्छाओं से मोहग्रस्त नहीं होती |

10. उसकी इन्द्रियाँ उसके अपने वश में रहती हैं |

11. उसका व्यवहार सदा मधुर, मृदु तथा आदर्श होता है |

12. वह स्वामित्व भाव से मुक्त रहता है |

13. वह कभी भी सांसारिक कार्यकलापों के लिए प्रयास नही करता |

14. वह भोजन में संयम बरतता है |

15. वह शान्त व स्थिर अर्थात मन को वश में करने वाला होता है |

16. वह अपने कर्तव्य-पालन में अत्यन्त सतर्क रहता है |

17. वह मुझे ही एकमात्र आश्रय मानता है |

18. वह विचारवान होता है |

19. उसमे कभी भी ऊपरी विकार नही आ पाते |

20. वह दुखद परिस्थितियों में भी स्थिर व नेक बना रहता है |

21. उसने भूख,प्यास,शोक,मोह,जरा तथा मृत्यु इन छह भौतिक गुणों पर विजय पा ली होती है |

22. वह अपनी प्रतिष्ठा की इच्छा से मुक्त होता है और अन्यों को आदर प्रदान करता है |

23. वह अन्यों की कृष्ण-चेतना को जाग्रत करने में कुशल होता है |

24. वह कभी भी किसी को धोखा नही देता है |   द्

25. वह सभी का शुभैषी मित्र होता है और अत्यन्त दयालु होता है |

26. वह मेरे द्वारा नियत किये गए धार्मिक कर्तव्यों को भलीभांति समझता है |  

27. वह जानता है कि इन कर्तव्यों की उपेक्षा से जीवन में त्रुटी आती है |

28. वह मेरे चरण-कमलों की शरण ग्रहण करके सामान्य धार्मिक कार्यों को त्याग कर एकमात्र मेरी पूजा करता है |

कृष्ण कहते हैं इसलिए भगवद्-भक्त जीवों में सर्व-श्रेष्ठ माना जाता है |

उपुर्युक्त गुणों के विकास के अनुसार ही आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों की स्थिति का पता लगाया जा सकता है |                     श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर के अनुसार सत्रहवाँ गुण (मत-शरण) सबसे महत्वपूर्ण गुण अर्थात भगवान कृष्ण की शरण ग्रहण करना है | भगवान अपने निष्ठावान भक्त को सारे गुण प्रदान कर सकते हैं |    

हरे कृष्णा

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