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१९६५ में “सिंधिया स्टीम नेविगेशन कंपनी” देश की सबसे पुरानी, बड़ी और जानी-मानी जलपोत कंपनियों में इस एक हुआ करती थी। मालवाहक पोत होने के कारण अधिकतर उनके जहाजों में दवाइयाँ, कपड़े, खाद्य पदार्थ इत्यादि बड़े बड़े बक्सों में भर कर कई देशो में भेजा जाता था।
उसी वर्ष के अगस्त महीने में एक मालवाहक-पोत, जिसका नाम "जलदूत" था, एक ऐसे सवारी को बैठा कर ले गया जो आने वाले दिनों में संसार भर में एक इतिहास रचने वाला था।
जलदूत नाम का वह पोत अपने नाम का पूरक है,: ऐसा पोत जो जलमार्ग से भगवन्नाम के प्रचार हेतु आध्यात्मिक लोक से भेजे गए दूत को बैठा कर ले गया । उसके आगे जो हुआ वह इतिहास है । मनुष्य प्रजाति के लिए इस से अनूठा और अनमोल उपहार न कभी किसी ने दिया और न आने वाले १०,००० वर्षो तक दे पायेगा । 
श्रील प्रभुपाद ने जो किया वह अद्वितीय है । मानव परिकल्पना के परे है । उन्होंने असंख्य जीवों को जन्म-मृत्यु के चक्र से बचाकर शुद्ध भक्ति प्रदान की ।

राधा रसिकराज दास

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