Hare Krsna,
Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.
श्रीमद् भागवतम (7.11.2 & 8-12) में महाराज युधिष्ठर जीवन के परम लक्ष्य भक्ति को प्राप्त करने के लिए धर्म के सिद्धांतों के विषय में नारद मुनि से बतलाने को कहते हैं | नारद मुनि जीवों के धार्मिक सिद्धांतों के संरक्षक भगवान कृष्ण को नमस्कार कर कहते हैं कि, सभी मनुष्यों को कृष्ण भक्ति प्राप्त करने के लिए जिन सामान्य धार्मिक नियमों का पालन करना होता है, वे इस प्रकार हैं:
1. सत्य बोलना |
2. दया (प्रत्येक दुखी जीव पर दया) |
3. तपस्या (निश्चित दिनों को उपवास करना) |
4. दिन में दो बार स्नान करना (शौचम) |
5. सहनशीलता (तितिक्षा) |
6. अच्छे-बुरे का विवेक (ईक्षा) |
7. मन का संयम (शम:) |
8. इन्द्रिय संयम (दम:) |
9. अहिंसा |
10. ब्रह्मचर्यं |
11. दान (त्याग) |
12. शास्त्रों का अध्ययन (स्वाध्याय:) |
13. सादगी (आर्जवम) |
14. सन्तोष |
15. साधू पुरुषों की सेवा |
16. अनावश्यक कार्यों से क्रमशः अवकाश लेना |
17. मानव समाज के अनावश्यक कार्यों की व्यर्थता समझना |
18. गम्भीर तथा शान्त बने रहना एवं व्यर्थ की बातों से बचना |
19. मनुष्य शरीर तथा इस आत्मा के विषय में विचार करना |
20. सभी जीवों (मनुष्य तथा पशुओं) में अन्न का समान वितरण करना |
21. प्रत्येक आत्मा को परमेश्वर का अंश मानना |
22. पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान के कार्यकलापों तथा उनके उपदेशों को सुनना |
23. इनका नित्य कीर्तन करना |
24. इनका नित्य स्मरण करना |
25. सेवा करने का प्रयास |
26. भगवान की पूजा करना |
27. नमस्कार करना |
28. दास बनना |
29. मित्र बनना तथा
30. आत्म समर्पण करना |
नारद मुनि युधिष्ठर से कहते हैं: हे राजन! मनुष्य जीवन में इन तीस गुणों को अर्जित करना चाहिए | मनुष्य इन गुणों को अर्जित करने मात्र से पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान को प्रसन्न कर सकता है |
हरे कृष्णा
दण्डवत
आपका विनीत सेवक
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