Hare Krsna,
Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.
हमारे ब्रह्मांड में प्रत्येक भौतिक पदार्थ 5 मूल तत्व अर्थात पृथ्वी, वायु, जल, अग्नि, तथा आकाश से निर्मित है | जिस प्रकार मिटटी, वायु, नदियाँ आदि आज प्रदूषित हैं, उसी प्रकार द्वापरयुग में भी सब कुछ बहुत अधिक प्रदूषित था | भगवान कृष्ण ने किस प्रकार अपनी मनमोहक आकर्षक लीलाओं से पाँचों मूल तत्वों को प्रदुषण से मुक्त किया, यह लेख इन्हीं लीलाओं पर आधारित है |
1.प्रथ्वी तत्व: भगवान कृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं में प्रथ्वी तत्व को पवित्र करने के लिए मिटटी खाने की लीला की थी | जब नन्द महाराज, यशोदा माता तथा अन्य गोप, गोपियाँ यह लीला देखते थे तो क्या वे अपने पूरे ब्रज धाम में मिटटी को प्रदूषित कर सकते थे?| कभी नही |
2.वायु तत्व: भगवान कृष्ण जब केवल एक वर्ष के थे, तब एक बार वायु का एक बहुत बड़ा प्रदुषण का ऐसा घना बवंडर आया जिसमे कोई भी एक दूसरे को देख भी नही पा रहा था | असल में यह त्रनावृत नामक का एक असुर था जो इस रूप में आया था तथा नन्हे कृष्ण को लेकर हवा में ऊँचा उड़ गया था | लेकिन भगवान ने अपने आप को इतना भारी किया और उस असुर का गला दबाया कि वह और अधिक उनको लेकर ऊपर न जा सका और नीचे आकर नष्ट हो गया |
3.जल तत्व: यमुना नदी उस समय विष से इतनी प्रदूषित थी तथा ऐसी विषैली भाप निकलती थी कि ऊपर उड़ने वाले पक्षी भी उसके प्रभाव से गिर कर मर जाते थे | ऐसा कालिया नाग के उसमे रहने से था | भगवान कृष्ण ने इसको स्वच्छ करने के लिए गेंद खेलने की लीला की तथा जब गेंद यमुना के जल में गिर गई तो वे नदी में कूद गए और जल को मथ कर ऐसी क्रीडा की जिसे कालिया सहन न कर सका | तब कृष्ण ने कालिया के घमण्ड को चूर चूर कर उसके फनों पर नृत्य करते हुए अपने कोमल पैरों से इतना दाब बनाया की वह खून उगलता हुआ उनकी शरण में आकर अपने पूरे परिवार के साथ यमुना को छोड़ कर समुंद्र को चला गया और यमुना का जल शीतल स्वच्छ हो गया |
4.अग्नि तत्व: कालिया दमन की लीला की रात को भगवान कृष्ण ने अग्नि को पीकर उसे पवित्र किया | इसी प्रकार एक बार वृन्दावन के जंगलों में अपने गोप सखाओं की रक्षा के लिए उन्होंने अग्नि का पान किया था |
5.आकाश तत्व: आकाश का गुण है शब्द | आकाश तत्व को प्रदुषण मुक्त करने के लिए भगवान कृष्ण ने अपनी वंशी को इस्तेमाल करते हुए इतनी मधुर मनमोहक सुरीली तान छेड़ी कि सारा ब्रह्मांड ही माधुर्य रस से सरोबार हो गया |
हम सब भी भगवान कृष्ण की प्रेममयी सेवा प्राप्त करने का प्रयास कर रहें हैं | भगवान की इन लीलाओं की मधुरता से शिक्षा लेकर हम अपने मन व बुद्धि को भी भौतिक प्रदुषण से मुक्त कर सकते हैं तथा इस पवित्र जन्माष्टमी उत्सव पर साथ ही साथ यह संकल्प भी लें कि हम अपने किसी भी कर्म से इन पाँचों मूल तत्वों को प्रदूषित नही करेंगे तथा इन्हें प्रदुषण मुक्त करने के प्रयास में अपना भरपूर योगदान करेंगे |
हरे कृष्णा
दण्डवत
आपका विनीत सेवक
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