Hare Krsna,
Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj. This article is based on pravachan given by P.P.Rukmani Prabhuji on the importance of forthcoming Janmashtmi.
भगवान श्री कृष्ण इस धरा पर ब्रह्माजी के एक दिन में एक बार प्रकट या अवतरित होते हैं | ब्रह्माजी का एक दिन 430 करोड़ वर्ष (1000 चतुर्युग) तथा एक रात 430 करोड़ वर्ष अर्थात प्रत्येक 860 करोड़ वर्ष बाद भगवान श्री कृष्ण इस पृथ्वी पर बद्ध जीवों की दयनीय स्थिति देख कर उन पर कृपा बरसाने द्वापर युग के अन्तिम पहर में स्वयं अवतरित होते हैं | हम सब भाग्यशाली हैं कि यह सुबह समय अभी केवल 5241 वर्ष पूर्व ही गुजरा है और इस बार जन्माष्टमी पर हम सब भगवान कृष्ण के इस धरा पर अवतरित होने का 5242 वाँ प्रकट दिवस पूरे हर्षोल्लास तथा उत्साह से मनायेगें |
हम बद्धजीव, भगवान से अपने सम्बन्ध को भूल कर सुख भोगने व पाने के प्रयास में हमेशा किसी न किसी की सेवा में लगे रहते हैं क्योंकि मन का प्राकर्तिक कार्य सेवा करना है | तथा मायाजनित इन काल्पनिक सुखों के प्रयास में अपने कर्म-फलों द्वारा प्राप्त शरीरों में हम सब इस भौतिक जगत रुपी कारागार में, कष्ट पर कष्ट झेलते रहते हैं | षड-एश्वर्य पूर्ण भगवान अपने धाम में नित्य नयी नयी नूतन लीला कर अनगनित भक्तों के साथ आनन्द बांटते हैं | लेकिन भगवान हमारी दयनीय हालत देख कर दुखी होते हैं क्योंकि भगवान हम सब जीवों के बीजदाता पिता हैं | आप भी कल्पना करें कि यदि आपका पुत्र एक कारागार में बंद हो कर, सजा काट रहा हो तो क्या आप दुखी नही होंगे तथा उससे मिलने नही आयेंगे | और वह जल्दी से जल्दी कारागार से मुक्त हो कर अपने घर वापस आजाये ऐसा प्रयास नही करेंगे |
भगवान भी यही चाहते हैं कि हम भी इस भौतिक कारागार तथा इन कष्टों से मुक्त हो कर भगवद-धाम वापस आकर उनके साथ शाश्वत आनन्द का उपभोग करें | इसलिए वे अपने पार्षदों को तथा शुद्ध भक्तों को इस धरा पर भेजते हैं जो हमें हमारी वास्तविक स्थिति का अनुभव कराते हैं तथा हमें जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य भगवत-प्रेम प्राप्त करने तथा भगवद-धाम वापस जाने के लिए रास्ता दिखाते हैं | भगवान स्वयं भी इस धरा पर ब्रजधाम में अवतरित हो कर अपने साथियों के साथ ऐसी ऐसी सुन्दर व मधुर लीलाएं करते हैं ताकि हम भी उस प्रेम को पामे के लिए लालायित हों | भगवान हमारे कल्याण के लिए तथा हमारे मार्गदर्शन के लिए श्रीमद् भागवतम उपलब्ध कराते हैं और स्वयं भगवद् गीता के माध्यम से ऐसा दिव्य ज्ञान प्रदान करते हैं जिसे समझ व पालन कर हम इस भवसागर को आसानी से पार कर सके तथा वर्तमान जीवन की समाप्ति पर वापस भगवत-धाम जाकर अपने आध्यात्मिक स्वरुप को पाकर भगवान की दिव्य सेवा में अपने आप को समर्पित कर सकें | भगवान के शाश्वत धाम में काल का प्रवाह नहीं है इसलिए न वहाँ बुढ़ापा है, न ही बीमारियाँ हैं, न ही मृत्यु है और न ही कोई दुख है; है तो केवल भगवान के साथ शाश्वत आनन्द में हिस्सा |
यदि हम बद्ध जीव फिर भी सही रास्ते पर नही चलते अर्थात जन्म-मृत्यु के चक्र से बाहर निकलने के प्रयास नही करते तो भगवान कृष्ण इतने दयालु हैं कि वो जीव की प्रत्येक योनी में, हृदय में आत्मा के सखा के रूप में हमेशा साथ रहते हैं, चाहे हम मनुष्य योनी में हैं या मल के कीड़े की योनी में | जब जीवात्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में देहान्तर करता है तो भगवान जो उसके चिर सखा है, उस नए शरीर के हृदय में भी उसके साथ विराजमान रह कर उसके वापस अपने घर आने में उसकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं |
हरे कृष्णा
दण्डवत
आपका विनीत सेवक
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