Hare Krsna,
Please accept my humble obeisance. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.
भगवान कृष्ण के विभिन्न अवतार
श्री चैतन्य महाप्रभु ने श्रील सनातन गोस्वामी को शिक्षा देते समय भगवान कृष्ण के अवतारों का वर्णन किया (मध्य लीला अध्याय 20) | भगवान का वह रूप, जो सृष्टि करने के हेतु भौतिक जगत में अवतरित होता है, अवतार कहलाता है (मध्य लीला 20.263) | कृष्ण के अवतार असंख्य हैं और उनकी गणना कर पाना संभव नही है | जिस प्रकार विशाल जलाशयों से लाखों छोटे झरने निकलते हैं, उसी तरह से समस्त शक्तियों के आगार पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्री हरि से असंख्य अवतार प्रकट होते हैं (मध्य लीला 20.249)| भगवान कृष्ण के 6 तरह के अवतार होते हैं:
1. पुरुषावतार (3): कारणाब्धिशायी विष्णु(महा विष्णु),गर्भोदकशायी विष्णु तथा क्षीरोदकशायी विष्णु |
2. लीला अवतार (25): विभिन्न लीलाओं को संपन्न करने के लिए अवतार;
चतु:सन (सनक,सनातन,सनत कुमार व सनन्दन), नारद, वराह, मत्स्य, यज्ञ, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, हयग्रीव, हँस, प्रश्निगर्भ, ऋषभ, प्रथू, नृसिंह, कूर्म, धन्वन्तरी, मोहिनी, वामन, परशुराम, राम, व्यास, बलराम, कृष्ण, बुद्ध तथा कल्कि |
3. गुण-अवतार (3): जो भौतिक गुणों का नियन्त्रण करते हैं- ब्रह्मा (रजोगुण), शिव (तमोगुण) तथा विष्णु (सतोगुण) |
4. मन्वन्तर-अवतार (14) : जो प्रत्येक मनु के शासन में प्रकट होते हैं | ब्रह्मा के एक दिन में 14 मनु बदलते हैं | श्रीमद्भागवत (8.1.5&13) में मन्वन्तर-अवतारों की सूचि दी गई है- यज्ञ, विभु, सत्यसेन, हरि, वैकुण्ठ, अजित, वामन, सार्वभौम, ऋषभ, विष्वक्सेंन, धर्मसेतु, सुधामा, योगेश्वर तथा ब्रह्द् भानु | इसमें से यज्ञ तथा वामन की गणना लीलावतारों में भी की जाती है |
5. युग-अवतार (4): सतयुग में शुक्ल(श्वेत), त्रेतायुग में रक्त, द्वापर युग में श्याम तथा कलियुग में सामान्यता कृष्ण (काला), किन्तु विशेष दशाओं में पीतवर्ण यथा चैतन्य महाप्रभु |
6.शक्त्यावेश अवतार: जब-जब भगवान अपनी विविध शक्तियों के अंश रूप में किसी में विधमान रहते हैं, तब वह जीव शक्त्यावेश अवतार कहलाता है (मध्य लीला 20.373) |
वैकुण्ठ में शेषनाग (भगवान की निजी सेवा), अनन्तदेव (ब्रह्मांड के समस्त लोकों को धारण करने की शक्ति), ब्रह्मा (सृष्टि-शक्ति), चतु:सन या चारों कुमार (ज्ञान-शक्ति), नारद मुनि (भक्ति-शक्ति), महाराज प्रथू (पालन-शक्ति) तथा परशुराम (दुष्टदमन-शक्ति) |
हरे कृष्णा
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