कृपया बहुत ध्यान से पूरा पड़े -
एक बार एक व्यक्ति ने प्रभुपाद जी से के कहा की-
आपके मंदिर में कई ऐसे भक्त है जो बिल्कुल भौतिकतावादी लोगो की तरह कार्य कलाप करते है तो कई बार तो उनसे भी बुरे कार्य करते है तो हममें और ऐसे भक्तो में क्या फ़र्क़ है तो प्रभुपाद जी ने बहुत अच्छा उत्तर दिया,
प्रभुपाद जी बोले- मंदिर अस्पातल की तरह है अस्पताल में कौन जाता है मरीज़, और मरीज़ का मतलब होता है बीमार व्यक्ति और जो डॉक्टर है वो मंदिर में गुरू के सामान है तो मंदिर में जो भक्त आते है वो मरीज़ की तरह है और वो अपना इलाज़ कराने आये है कोई ऐसा व्यक्ति देखा है जो पूर्ण रूप से ठीक हो और अस्पताल में भर्ती होने गया हो ?
तो जीतने भक्त है सब यहाँ इलाज़ के लिए आये है और सब बीमार है कोई ज्यादा कोई कम और हर व्यक्ति के अंदर कमिया है सब गुण सम्पन श्रीराम सिर्फ भगवान के अंदर कोई कमी नहीं है हम सब में कमिया है और सबसे बड़ी कमी है अपनी कमी के बारे में ना सोचना और दूसरे की कमियो को देखना तो जैसे जैसे कोई डॉक्टर यानी गुरु की बातो को जो जितना ठीक से मनाता है वो वैसे वैसे अपने घर यानि गोलोक या कृष्ण लोक वापस जाता है तो हमे भक्तो के अंदर कमियां नहीं देखना चाहिये क्योकि कृष्णा सबसे ज्यादा नाराज़ होते है जब कोई भक्तो के अंदर कमिया देखता है या सुनता है यहाँ तक चैतन्य महाप्रभु जी ने इस बात को बहुत ज़ोर देते हुये बोला है की अगर कोई व्यक्ति आपके सामने किसी भी भक्त की बुराई करता है तो आपको 3 कार्य करना चाहिये-
1- उस व्यक्ति के सामने उस भक्त की अछाई बताये
2- उस स्थान को तुरन्त छोड़ दे
3- जा के आत्महत्या कर लें |
फिर प्रभुपाद जी उनको बोले की कम से कम ये भक्त अपना घर भार छोड़ के भगवान की शरण में आये है आप तो माया में ही रहना चाहते हो |
जय श्री श्री राधा रासबिहारी की
जय श्रील प्रभुपाद जी की
हरे कृष्णा

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