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Sri Bhagwan Das's Blog (42)

Serving GOD

Hare Krishna, Please accept my humble obeisance. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

A mother sometimes withdraws or withholds toys from her child to ensure he doesn’t neglect his studies and miss out on a bright ca­reer. Similarly God sometimes withdraws or withholds our cherished toys – wealth, love, positions, possessions – to ensure we don’t neg­lect our spiritual growth and…

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Added by Sri Bhagwan Das on December 25, 2014 at 9:42pm — No Comments

भगवान कृष्ण की भक्ति-वत्सलता:

Hare Krsna, Please accept my humble obeisance. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

भक्त, भगवान् कृष्ण के ह्रदय में उसी तरह रहते हैं जैसे कंजूस के ह्रदय में धन | भक्ति भगवान् से भी बड़ी है क्योंकि यह भगवान् को आकर्षित करती है | भगवान् अपने बड़े से बड़े वर को तुच्छ मानते है, किन्तु अपने भक्त द्वारा की गई तुच्छ सेवा को बहुत बड़ा मानते हैं (SB.10.81.35) | भगवान् कृष्ण की…

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Added by Sri Bhagwan Das on December 7, 2014 at 9:35pm — No Comments

कलियुग के लक्षण एवं गुण

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

श्रील शुकदेव…

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Added by Sri Bhagwan Das on November 14, 2014 at 12:25pm — 1 Comment

भौतिक जगत के 14 लोक

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

श्रीमद् भागवतम के द्वतीय स्कन्ध के पाँचवे अध्याय में इस ब्रह्माण्ड के अन्तर्गत 14 भुवनों या लोकों का वर्णन किया गया है…

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Added by Sri Bhagwan Das on October 28, 2014 at 11:11am — No Comments

भगवान् कृष्ण द्वारा बताई गई अर्चाविग्रह की पूजा विधि

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

श्रीमद् भागवत (स्कन्ध 11 अध्याय 27) में भगवान् कृष्ण, उद्धव के पूँछने पर अर्चाविग्रह की नियत तथा विशिष्ट विधि का वर्णन इस प्रकार करते हैं :…

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Added by Sri Bhagwan Das on October 23, 2014 at 3:24pm — No Comments

पांच प्रकार की मुक्ति

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

मुक्ति पांच प्रकार की होती है, जिनका वर्णन चैतन्य चरितामृत मध्य लीला 6.266-269 में इस प्रकार किया गया है:

1. सालोक्य: सालोक्य का अर्थ है भौतिक मुक्ति के बाद उस लोक को…

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Added by Sri Bhagwan Das on October 15, 2014 at 10:28am — 1 Comment

भगवान कौन हैं ?

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisance. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

इस जगत में तथाकथित विद्द्वान मनुष्य देवताओं को भगवान के विभिन्न रूप मान लेते हैं | वस्तुतः ये देवता ईश्वर के विभिन्न अंश होते हैं जिन्हें भौतिक जगत का प्रबन्ध करने के लिए विभिन्न मात्रा में भौतिक शक्तियां प्राप्त हैं | ऐसे व्यक्ति इस जगत के कष्टों के स्थायी निवारण के लिए…

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Added by Sri Bhagwan Das on October 2, 2014 at 11:09am — 7 Comments

भगवान की कामना

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

भगवान की कामना- इस लेख का यह शीर्षक कुछ अजीब नही है? भगवान जो समस्त ब्रह्मांडों के तथा षड ऐश्वर्यों के पूर्णतम स्वामी हैं, क्या कोई कामना की इच्छा रखेंगे? लेकिन यह सच है | वे शुद्ध भक्तों की चरण-कमलों…

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Added by Sri Bhagwan Das on September 28, 2014 at 11:23am — 2 Comments

अर्चाविग्रह की पूजा के लिए 64 वस्तुएँ

Hare Krsna,

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चैतन्य महाप्रभु ने सनातन गोस्वामी को (मध्य लीला 24.334) हरिभक्ति विलास की रूपरेखा बताई जिसमे वे उनसे श्रीविग्रह की पूजा के विषय में बताते हुए कहते हैं तुम पांच,सोलह या पचास वस्तुओं की…

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Added by Sri Bhagwan Das on September 27, 2014 at 10:57am — No Comments

नवधा भक्ति

Hare Krsna,

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श्रीमद् भागवतम (7.5.23) के अनुसार, प्रहलाद महाराज ने अपने पिता दैत्य-राज हिरन्यकशिपू के पूछने पर सर्वश्रेष्ठ  शिक्षा के रूप में नवधा भक्ति (9 प्रकार की भक्ति) का वर्णन किया:

1. श्रवणं: भगवान के पवित्र नाम को सुनना भक्ति का शुभारम्भ है |…

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Added by Sri Bhagwan Das on September 25, 2014 at 11:20am — No Comments

साधन भक्ति के 64 अंग

Hare Krsna,

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                             साधन भक्ति के 64 अंग

चैतन्य महाप्रभु सनातन गोस्वामी को (मध्य लीला अध्याय 22,114-129) भक्ति संपन्न करने के विधानों के…

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Added by Sri Bhagwan Das on September 25, 2014 at 11:03am — No Comments

दुर्जय मृत्यु पर विजय पाने का दिव्य ज्ञान

Hare Krsna,

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भगवान कृष्ण ने उद्धव से (श्रीमद् भागवतम के स्कन्द 11) भक्ति के उन सिद्धान्तों का वर्णन किया जिनको संपन्न करने से मनुष्य (मर्त्य प्राणी) दुर्जय मृत्यु पर विजय पा सकता है | इस मुक्तिप्रदायक ज्ञान के मुख्य अंश इस प्रकार है :

हे…

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Added by Sri Bhagwan Das on September 10, 2014 at 9:46am — No Comments

Classification of Devotees

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

As par Nectar of Devotion,devotees can be divided into following three classes:

1. The first-class or…

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Added by Sri Bhagwan Das on September 4, 2014 at 10:18am — No Comments

भक्तों की प्रार्थनाएँ

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

मनुष्य जीवन की सर्वोच्च सिद्धि भगवत्प्रेम प्राप्त करने के लिए प्रह्लाद महाराज (भगवत-धर्म को पूर्णतया जानने वाले बारह महाजन में एक) षड-भक्ति का वर्णन करते हैं, जिसका पहला व महत्वपूर्ण अंग है- प्रार्थना करना अर्थात भगवान से अहैतुकी भक्ति के लिए…

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Added by Sri Bhagwan Das on September 3, 2014 at 5:08pm — 2 Comments

भक्त प्रह्लाद द्वारा अपने सहपाठियो को भागवत धर्म का उपदेश

Hare Krsna,

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भक्त शिरोमणि प्रह्लाद ने अपने दैत्य सहपाठियों को जीवन का परम लक्ष्य भक्ति-योग तथा भागवत धर्म का सरल वर्णन किया जिसे समझ कर एक बद्ध जीवात्मा भी भगवद्-धाम वापस जा सके (स्कन्द 7: अध्याय 6-7) :

प्रह्लाद महाराज कहते हैं: बुद्धिमान मनुष्य को चाहिए कि वह जीवन के प्रारम्भ से ही अन्य सारे कार्यो को छोड़ कर भक्ति-कार्यो के अभ्यास में इस मानव शरीर का उपयोग…

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Added by Sri Bhagwan Das on August 30, 2014 at 3:00pm — No Comments

कृष्ण-भक्ति प्राप्त करने के लिए धार्मिक नियमों के तीस गुण

Hare Krsna,

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श्रीमद् भागवतम (7.11.2 & 8-12) में महाराज युधिष्ठर जीवन के परम लक्ष्य भक्ति को प्राप्त करने के लिए धर्म के सिद्धांतों के विषय में नारद मुनि से बतलाने को कहते हैं | नारद मुनि जीवों के धार्मिक…

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Added by Sri Bhagwan Das on August 29, 2014 at 1:01pm — No Comments

भक्तिमार्ग में भगवान के रूप माधुर्य पर ध्यान करने की विधि

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

श्रीमद् भागवतम (3.28.12-36) में भगवान कपिल ने अपनी माता देवहुति को भक्ति-योग का वर्णन करते समय भक्ति साधना के लिए भगवान के स्वरुप पर ध्यान लगाने की विधि का वर्णन इस प्रकार किया:…

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Added by Sri Bhagwan Das on August 28, 2014 at 9:34am — No Comments

भगवान कपिल द्वारा माता देवहूति को भक्तियोग व भगवद्-धाम वापस जाने का ज्ञान

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisance. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

भगवान कपिल ने अपनी माता देवहूति के पूछने पर इन्द्रियतृप्ति के बन्धन से मुक्त होने तथा दिव्य साक्षात्कार के लिए भक्तियोग का ऐसा सरल वर्णन किया जिसे एक स्त्री भी भलीभांति समझ सके व भगवद्-धाम वापस जा सके (स्कन्द 3: अध्याय 25-33):…

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Added by Sri Bhagwan Das on August 27, 2014 at 11:36am — No Comments

चतु:श्लोकी श्रीमद् भागवतम तथा चतु:श्लोकी श्रीमद् भगवद् गीता

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisances. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

भगवान ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी को श्रीमद् भागवतम का सार; भगवान से हमारा सम्बन्ध, उस सम्बन्ध में हमारे कार्य तथा जीवन का लक्ष्य, इन 4 श्लोक में (चतु:श्लोकी) प्रदान किया…

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Added by Sri Bhagwan Das on August 24, 2014 at 10:33am — 1 Comment

कर्म-फलो से मुक्ति तथा भगवान के धाम वापस जाने के सुगम उपाय :

Hare Krsna,

Please accept my humble obeisance. All glories to Srila Prabhupada & Srila Gopal Krishna Maharaj.

अल्प बुद्धि तथा कम आयु वाले आलसी मनुष्य रात को सोने में तथा दिन को व्यर्थ के कार्यो में बिता देते हैं (SB.1.16.9) | जो लोग भौतिकतावादी जीवन के प्रति आसक्त होते हैं और आध्यात्मिक जीवन के प्रति अन्धे बने रहते हैं, अपने कर्मों की क्रिया-प्रतिक्रिया के फलस्वरूप…

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Added by Sri Bhagwan Das on August 24, 2014 at 10:02am — No Comments

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